ये भी लव जिहाद वो भी लव जिहाद – लव जिहाद ही लव जिहाद, टीना डाबी तलाक़ मामले भी लव जिहाद के शिकार हैं ?

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tina dabi divorce and love jihad 2018

साल 2015 की बात है, दिल्ली की रहने वाली “टीना डाबी” ने भारत के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSE को पहले ही प्रयास में टॉप कर लिया था।

उसके बाद भारत सरकार द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में दूसरे रैंक पाने वाले “अथर आमिर खान” से जब वो पहली बार मिली थी, उसके बाद से ही उन दोनों में प्रेम काफी प्रेम देखने को मिल रहा था।

जब उन दोनों को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग दिया जा रहा था (मसूरी, उत्तराखंड) तब से ही उन दोनों के बिच प्यार के सम्बन्ध और भी मजबूत होते गए।

20 मार्च 2018 को टीना डाबी ने “अथर आमिर खान” के साथ शादी कर ली और अपना उपनाम खान के साथ जोर लिया उसके बाद से ही मीडिया के द्वारा उसे कश्मीरी बहु कहा जाने लगा वहीँ कुछ मौलानाओं के द्वारा इस रिश्ते को भीम – मीम (दलित – मुस्लिम) एकता से जोड़कर मीडिया में प्रचलित किया जाने लगा।

मुश्किल से उनके रिश्ते को 2 साल भी नहीं हुए थे तभी से उनके सोशल मीडिया फॉलोवर्स ने उनके प्रोफाइल पर चल रहे बदलावों को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया और पाया की उनका उपनाम वापिस अपने वास्तिविक रूप में आ गया है, जिसके बाद से टीना ने अपने प्रोफाइल से जुड़ी कश्मीरी बहु का टैग भी हटा दिया और अब उन्होंने “अथर आमिर खान” को अनफॉलो भी कर दिया उसके साथ ही टीना डाबी ने अपने इंस्टाग्राम के स्टोरी में उनहोंने लिखा “सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना, जय श्रीराम”।

अब मिली खबर के मुताबिक पता चला है की अथर आमिर खान और टीना डाबी ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला लिया है। अब दोनों ने 17 नवंबर 2020 को जयपुर के एक फैमिली कोर्ट में तलाक़ की अर्जी डाली है

पहले जब उन दोनों परिवारों के बिच शादी की बात चल रही तब भारत के हिन्दू संगठनों ने इस प्रेम विवाह पर आपत्ति जताते हुए कहा था की एक मुस्लिम लड़का हिन्दू लड़की से विवाह नहीं कर सकता जिसके बाद से इस मुद्दे को काफी तुल दिया जाने लगा की दोनों पढ़े – लिखे, सक्सेसफुल हैं और दोनों ही भारत के उच्च अधिकारी भी हैं इसलिए दोनों के प्यार को धर्म – संप्रदाय से ऊपर उठ कर देखना चाहिए।

आखिर ऐसा क्यों होता है की जब कोई हिन्दू लड़की किसी मुस्लिम पुरूष के साथ शादी करती है तो उस हिन्दू लड़की को अपना धर्म छोर इस्लाम मजहब को अपनाना पड़ता है, वहीँ इसका ठीक उलट कोई मुस्लिम लड़का हिन्दू धर्म क्यों नहीं अपनाता है या उस लड़की को ये छूट क्यों नहीं दी जाती की तुम अपने धर्म के रह कर भी विवाह कर सकती हो ???

अब तक के जितने भी शादी ऐसे हुए हैं वो ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाती, आखिर ऐसा क्यों होता है वही लड़का अपने शादी के 1 – 2 सालों के बाद हीं पहले रही पत्नी को तलाक़ देकर दूसरी शादी कर लेता है ???

हाल ही के ऐसे हुए ऐसे घटनाओं के आंकड़ों को मिला कर देखने पर मालूम होता है की 90% महिलाओं को नाम बदल कर पहले प्यार के जाल में फंसाया जाता है जब वो इस जाल में फंस जाती है उसके बाद शादी के लिए उन्हें अपना धर्म छोर इस्लाम मजहब को अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है चाहे वो आसानी से मान जाये या उस लड़की के साथ हुए अश्लील photos और videos को सार्वजनिक करने का धमकी दिया जाता है जो मान लेती हैं, उनके साथ विवाह कर 5 – 10 बच्चे पैदा करने के बाद जब महिला की यौवन ढलने लगती है तब उसे छोर दूसरे, तीसरे ,…. ये सिलसिला चलता ही रहता है।

वहीँ जो लड़की इस साजिस को पहले समझ जाती है या कहीं से इसके बारे में जान लेती हैं या वो खुद को अपने ही धर्म व तौर तरीके से रखना चाहती हैं तब वो मुस्लिम लड़का उसके साथ रहे संबंधों के photos और videos सार्वजनिक करने का धमकी देता है नहीं मानने पर सार्वजनिक भी कर देता है, तब लड़की खुद को फांसी लगा लेती है या अन्य विधियों से अपनी आत्महत्या कर लेती हैं, अगर ऐसा भी नहीं हुआ तो वो मुस्लिम लड़का अपने 5 – 7 साथिओं को बुला कर उस लड़की का रेप करता है और अंत में उसे मार डालता है, बाद में उसकी लाश सूटकेस में पड़ी कहीं नदी – नालों में फेंकी मिलती है।

आज से ठीक 3 हफ्ते पहले निकिता तोमर मामले में भी यही देखने को मिला था; बता दें की भारत में अब ऐसे लोगों की संख्यां लगातार बढ़ने के कारण लोग इस तरह के कृत के विरोध में आवाज उठाना शुरू कर दिया है और सरकारों से सख्त कानून की मांग कर रहे हैं और ऐसे मामलों को लव जिहाद का नाम दिया है, वहीँ अब कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जैसे उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और हरयाणा में ऐसे घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा की हमारी सरकार अब लव जिहाद के खिलाफ जल्द ही कठोर कानून लाने जा रही है जिससे देश के लड़कियों का भय कम किया जा सके और उनके माता – पिता को अपने लड़कियों के उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजने के डर को काम किया जा सके।

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