महाराष्ट्र सरकार पत्रकारों और मीडिया के लोगों को पड़ेशान कर अपने अधिकारों का कर रही गलत इस्तेमाल

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महाराष्ट्र में जब से शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई है तभी से जनता और पत्रकारों के बुरे दिन शुरू हो गए।

महाराष्ट्र में ना ही साधु – संत सुरक्षित हैं, और ना हीं पत्रकार और वहां के लोग। 2019 के दीवाली से लेकर 2020 की दीवाली को आने तक ना जानें महाराष्ट्र सरकार द्वारा कितने ही अपराध हुए हैं।


पालघर में संतों की हत्या, बिहारियों पर अत्याचार, दिशा सालियान की रेप के बाद हत्या, सुशांत सिंह राजपूत की हत्या, नषीली पदार्थों की बिक्री, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के 1000 से ज्यादा रिपोर्टरों व सहकर्मियों पर फर्जी FIR, अर्नब गोस्वामी पर हमला और अब जेल!


4 नवंबर की सुबह मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संपादक अर्नब गोस्वामी के साथ मार – पीट कर उन्हें असंवैधानिक तरीके से जेल ले आने के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने सारी हदें पार कर दी।


बता दें की जब से मुंबई में हो रहे एक के बाद एक घटनाओं को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल से “रिपब्लिक भारत” ने निर्दोषों पे हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई है, तब से लेकर अब तक उनके रिपोर्टरों तथा चैनल के मुख्य संपादक व चैनल के मालिक अर्नब गोस्वामी को जबरदस्ती पड़ेशान किया जा रहा।


लोगों ने अर्नब को सच्चाई दिखने के लिए खूब सराहा पर जब से महाराष्ट्र सरकार द्वारा अर्नब गोस्वामी को जेल लाया गया है, लोगों में महाराष्ट्र की सरकार और उनके तंत्र के खिलाफ गज़ब का जन आक्रोश देखने को मिल रहा। लाखों लोगों ने 4 दिनों से ट्विटर पर अर्नब की रिहाई का ट्रेंड चला रहे हैं। वहीँ बड़ी संख्यां में लोग विभिन्न राज्यों से सड़कों पर उतरे हुए हैं और महाराष्ट्र व केंद्र सरकार से न्याय की माँग कर रहे हैं।

खाश तौर पर लोग केंद्र की तरफ अपनी आश लगाए बैठे हैं की शायद केंद्र से कुछ मदत मिले पर केंद्र की तरफ से अभी तक कुछ सुनने को नहीं मिला।

अर्नब गोस्वामी ने मीडिया से बात करते हुए कहा की मुझे मेरे वकील से मिलने नहीं दिया जा रहा, और जब मैंने वकील से मिलने का जिक्र किया तो पुलिस द्वारा मुझे मारा गया साथ ही उन्होंने कहा की मेरी जान को खतरा है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार से मदत की गुहार लगाई।


अर्नब गोस्वामी की तरफ से उनका केस CJI “हरीश साल्वे” जी लड़ रहे हैं, पिछले दिनों की सुनवाई से अब तक कुछ फर्क देखने को नहीं मिला पर उम्मीद है की आज 9 नवंबर 2020 को 3 बजे तक कुछ सुनने को मिले।

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